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खुश रहने की बीमारी (Being Happy Syndrome)

हम बजाएं हारमोनिया
खुश रहने की बीमारी - छोटे शहरों में प्रायः पायी जाती थी, या यूँ कहें अभी भी पायी जाती है. ये बड़ी ही संक्रामक बीमारी होती है. पर समय के साथ कुछ मनुष्यों ने खुशियों के विरूद्ध भी अपनी प्रतिरक्षा (immune) को तगड़ा कर लिया है.

खुश रहने की बीमारी - अर्थ एवम विकल्प


जितना आसान कहना- सुनना, खाना-पीना, सोना-जागना जैसे कार्य होते हैं, उतना ही आसन खुश रहना भी होता है. या संभवतः ये बीते दिनों की बात है, अब ये उससे कहीं कठिन हो चूका है. देखिये, ज्यादा कुछ करना नहीं होता है इस सुलभ बीमारी से ग्रसित होने के लिए, दुनिया की तरफ दिखिए, मस्ती मारिये, गलतियाँ निकालिए, मजाक करिए, मस्त मुस्कान चेहरे पे लाइए, अन्दर जितना द्वेष भरा है थूक मारिये, गाना गाइए  "**** मराये दुनिया, हम बजाएं हारमोनिया" और खुश रहिये. सोच सोच के कोई न पहलवान बना, न धनवान; हालांकि, केवल खुश रह के भी लोगों ने बड़े तीर नहीं मारे - पर इतना तो है की उन्होंने जिंदगी बड़ी ही शानदार तरीके से मस्ती में काटी...

मस्त रहो मस्ती में, आग लगे बस्ती में
अब जरा उन विकल्पों पे गौर करने कोशिश करते हैं, जिनकी हम प्रायः ही उपेक्षा करते हैं.
१. सुबह उठते ही हम या तो बाहर बज रहे ४००० अश्वशक्ति के निर्लज्ज रेलवे इंजन के सायरन को गालियान दे पुरे दिन को मटियामेट कर सकते, या एक काल्पनिक ही सही भगवान् को एक सुबह और दिखाने के लिए धन्यवाद कर एक अच्छी शुरुआत कर सकते. उतना भी नहीं तो, माँ-पिता, पत्नी, बच्चों को देख तो ख़ुशी होती ही है, इस बात पर तो आराम से खुश हुआ जा सकता की एक दिन और बिताने मिला अपने प्रिय लोगों के साथ...
२. कहीं किसी वास्तविक परेशानी के समय अन्यथा परेशान हो परेशानी को बढ़ाना बड़ा ही आसान काम है. सभी करते हैं. यहाँ पर कोई सिरफिरा ही खुश होने को कहेगा, परन्तु शान्ति से आराम से बिना गर्म हुए...कार्य को संपन्न करना भी तो वस्तुतः ख़ुशी की तरफ अग्रसर करता है. कर के देखिये, अच्छा तो लगता है :)
www.ishavidhya.org
३. ये शायद विवादस्पद हो सकता, पर जब लगे की आप दुनिया के सबसे ज्यादा बजे हुए इंसान हैं, जिंदगी ने आपके मारने की ठान ही राखी है; तो महाराज जरा गर्दन घुमाइए - आपको आपसे कहीं दुखी, कहीं परेशान, रोते -  बिलखते इंसानों की फौज कड़ी दिखेगी. थोड़ी सादवाद वाली भावना जागृत हो सकती, पर इस बात का संबल भी मिलेगा की जिंदगी से हो रही लड़ाई में आप अकेले नहीं है. आपसे भी कहीं ज्यादा बजे, ठुके हुए लोग अपनी राह बनाने में जी-जान से लगे हुए. रो नहीं रहे. उस समय आप खुश होंगे! और ये ख़ुशी, कुछ एक हार से तो आपको शायद ना बचा पाए, पर कुछ एक नयी उचाइयां पर तो जरुर ही पहुंचाएगी!
४. सारे मैं ही बताओं, या आप खुद भी निकलेंगे ख़ुशी को खोजने और गले लगाने?

संक्रमण
ख़ुशी की उम्र नहीं होती
मैं स्वयं ख़ुशी का संक्रामक मानता था. पर आज कल दुखी-रहने के आदतन इतने लोग दिखने/मिलने लगे हैं की डर सा लगता है की साले कहीं मुझे भी अपने साथ दुःख के अन्धकार में न खींच ले जाएँ. अब जैसे उन लोगों को लीजिये, जिन्हें अपने बॉस से जन्मो का बैर है -उन्हें इस बात का जरा भी पता नहीं की कुछ एक भाग्यशाली ही होते जिन्हें चाहे-हुए बॉस मिलते बाकी सब मरवा-मरवा ही अपनी साख बनाते. प्रेम में हारे उन चूतियों को लीजिये जिन्होंने social networking और शायरी में पनाह ले रखी है - ये लोग दुःख फैलाने वाले सबसे गंदे पिस्सू होते.
ख़ुशी का संक्रमण जुदा है. आप खुश होते हैं, हर जगह सावन के अंधों की तरह आपको हरियाली दिखती है, आप सदैव कुछ अच्छा देखने की चाहत रखते हैं, जिंदगी से कुछ न कुछ मांगते - मनाते रहते हैं, गाहे-बगाहे कुछ बाशिंदों को खुश कर जाते हैं - और फिर खुश हो जाते हैं.

पागलपन
हर बात पर खुश रहना पागलपन भी कहा जाता है. पर इसमें बुराई ही क्या है, भाई पागल ही कहा जा रहा; मुर्दा तो नहीं! दुःख तो जीवित-मुर्दे का जीवन होता. आप पागल हैं तो क्या, जीवित तो हैं :) कुछ दिनों पहले एक अंग्रेजी अखबार में एक लेख पर नजर गयी, हाल कुछ यूँ था की "अगर आप कुछ ज्यादा खुश हैं, तो आप बीमार हो सकते, मानसिक चेकअप कराएँ". मतलब अब तो सभी को पता है की खुश रहना एक बीमारी है, जो नहीं पता है...वो ये है की आज के भागते दौड़ते जीवन में, जब किसी के गुजर जाने पे भी उसके कभी आसपास होने का एहसास होता - ख़ुशी ही वो सबसे सस्ती , हिंग-लगे न फिटकरी - चोखे रंग, वाली भावना रह गयी है जिसे हर जगह सुलभ कराया जा सकता. एक दिन हंसी ख़ुशी से शुरुआत करके तो देखिये खुद-बा-खुद समझ जयेगने, ये ख़ुशी कितनी खुशनुमा और कामिनी चीज़ होती है. ये ऐसी बीमारी होती है जिसे फैलने के लिए चुने की भी जरूरत नहीं पड़ती, खुश रहिये...अपने आप आपका पड़ोस खिलखिला पड़ेगा...
छोटे शहरो में, धीमी रफ़्तार जिंदगी में, निठल्ले बैठे - खुश रहना आसान है; पर बड़े शहरों में, तेज़ी से बदलती दुनिया में, दौड़ते-भागते हुए भी...इतना तो मुमकिन है ही की एक मुस्कान आप खुद के साथ लगायें रखें...जहाँ कोई मिले, थोड़ी से ख़ुशी बाँट आगे बढे.. :)



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Comments

  1. brilliant stuff and a unique concept thanks cheers

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  2. great stuff it is one of the rare unique conceptualized article thanks

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  3. Glad that you liked this post, Mohan :)
    Do visit again, and I hope you have went through my post on Indian Bikers too...

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  4. chennai flowerplaza20 April 2012 at 16:50

    Lovely…


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  5. Sahi kaha...Khusiyan sirf dusro ks majak urakar hasne me nahi balki khud ka majak banakar dusro ke sath khusiyan baantne me hai....

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  6. खुद पर हंस सकना तो अपने आप में एक कला है... :)

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  7. Gurgaonflowerplaza4 May 2012 at 17:12

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  8. ittech Thanks for the visit, and really obliged that you liked it :)

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  9. Gurgaonflowerplaza7 June 2013 at 21:02

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  10. Finally read this post. Agree with you totally on how important it is to be happy!

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